इस्लाम में औरत को तलाक का अधिकार

हमारे समाज में शादी को बहोत महत्व दिया जाता हे. और ख़ास कर लड़कियों की जिंदगी में

ज्यादातर माँ-बाप एवं परिवारवाले चाहते हैं की लड़की की जिंदगी या जीवन शैली कुछ इस तरह

रहे की उसे शादी में कोई दिक्कत न आये. अच्छे खासे पढ़े लिखे परिवारों की लडकियां भी ये

सुनकर बड़ी होतीं हैं: तुम्हे पराये घर जाना हे; तुम ये मत करो या वो मत करो. लड़की की

परवरिश, संस्कार एवं तरबियत, यहाँ तक की शिक्षा – हर चीज उसकी शादी को मद्दे नजर

रखकर की जाती हे. हमारे समाज में व्यक्ति की शादी को उसकी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव

या उपलब्धि माना जाता हे. ज्यादा से ज्यादा २२ या २३ की उम्र में लड़की की शादी की बात

शुरू ना हो तो सबके आतुरता जाग उठती हे की आखिर क्यों इस लड़की की शादी की कोई

बातचीत नहीं चल रही! क्या उसमें कोई कमी या खोट तो नहीं हे! और शादी पर इस तरह के

ज़ोर के चलते तलाक या विवाह विच्छेद को बड़ी बुरी चीज समझा जाता हे. इस्लाम धर्मं से जुड़े

संप्रदायों में भी करीब करीब येही माहोल हे. लड़की बालिग़ होते ही शादी की बात खड़ी हो जाती

हे फिर चाहे वह चाहती हो या नहीं. यहाँ तक की इस्लाम मजहब में औरतों को दिए गए तलाक

के अधिकार के बारे में जनकारी समाज में बहोत कम पाई जाती हे. जब की पति के द्वारा दिए

जानेवाले तलाक के बात आम हे. इस्लाम औरत को अपनी मर्ज़ी से तलाक लेने का अधिकार

देता हे लेकिन इस बात की जानकारी कितने परिवारों को हे? इस्लाम के विद्वानों [फुकाहा] ने

“खुला” अर्थात औरत के तलाक के अधिकार के बारे में विस्तृत रूप से अध्ययन किया हे जो

दर्शाता हे की ये अधिकार औरत के मुलभुत अधिकारों में से हे.

 

कुरान इस्लाम धर्मं की सबसे आला किताब हे. यहाँ शादी को पुरुष एवं स्त्री के बिच गंभीर एवं

विधिवत करार के रूप में देखा गया हे. और इसके चलते दोनों ही पक्षों को करार को रद्द करने

का अधिकार प्राप्त हे. [२:२२९,२३१,२३२, ६५:२]. यहाँ तलाक के फैसले के साथ कोई मूल्य

परिभाषा या value judgment जुडी हुई नहीं हे. लेकिन हमारा समाज इसके साथ अच्छाई या

बुराई का मूल्य जोड़ देता हे. मजहब में पुरुष तथा स्त्री को दो बराबरी के पक्षों की तरह माना

गया हे. और येही वजह हे की शादी के करार में दोनों की रजामंदी जरुरी हे. येही वजह हे की

शादी के लिए दोनों पक्षों का बालिग़ या होशमंद होना जरुरी हे. वही व्यक्ति बालिग़ हे जो एक

परिपक्व दिमाग और परिपक्व शारीर रखता हो. जिसकी स्वतंत्र मर्जी और नामर्जी चलती हो.

यहाँ बाल विवाह की कोई गुंजाईश नहीं हे. और जाहिर सी बात हे की एक व्यक्ति जो करार

करने की कुवत रखती हो वे इस करार को रद्द करने के लिए भी सक्षम हे.

 

किसी भी स्त्री के खुला या तलाक लेने के कई कारण हो सकते हैं; कुछ उसी तरह जैसे शादी

करने के लिए अनेक कारण हो सकते हैं! इस्लामिक शादी या निकाह के रिश्ते में पत्नी तीन प्रमुख

वजहों से खुला या तलाक की क़ानूनी करवाई शुरू कर सकती हे. शारीरिक कमी या एब, पति के

द्वारा गेर-वर्ताव तथा क़ानूनी क्रूरता. असल में इन तीन आयामों में जिंदगी के करीब करीब सभी

क्षेत्रों का समावेश हो जाता हैं. यदि पति गायब रहे तो वह अपने शारीरिक कर्तव्यों को निभाने में

विफल रहेगा. तब पत्नी खुला ले सकती हे. अब जरा सोचिये. आधुनिक जीवन में प्रेशर के चलते

यदि पति घर समय पर न लौटे और रोज देर रात घर आए तो पत्नी तलाक ले सकती हे. यहाँ

तक की इतिहास में पति का चेहरा आकर्षक न लगने पर भी पत्नी के खुला लेने का उल्लेख

मिलता हे! शादी के करार के मुताबिक यदि कोई भी पति अपनी पत्नी के रख-रखाव एवं सुख-

शांति की ज़िम्मेदारी न निभा पाने पर भी पत्नी को खुला का हक बनता हे. फिर आचरण,

स्वाभाव और वर्तन तो बहोत ही व्यापक क्षेत्र हैं जिनके में असंतुष्ट होने से पत्नी को खुला का

अधिकार दिया गया हे. और क़ानूनी क्रूरता की परिभाषा तो बहोत ही व्यापक हो सकती हे! याने

मुस्लिम स्त्री को अपने पति का कोई भी गलत आचरण सहने की मज़बूरी नहीं हे. उसे प्रेम,

गरिमा, मानसिक एवं शारीरिक पर्याप्तता का संपूर्ण अधिकार हे.

 

इस्लाम मजहब के इन्ही मूल्यों तथा मापदंडो के चलते हमार्रे देश में मुस्लिम विवाह विच्छेद

कानून, १९३९ [Dissolution of Muslim Marriage Act, 1939] अस्तित्व में हे. यह कानून

केवल मुस्लिम पत्नी के तलाक के अधिकार के बारे में हे. इस कानून के मुताबिक भारत में कोई

भी मुस्लिम स्त्री अपने पति से यहाँ दी गयी नौ विस्तृत वजह के आधार पर तलाक ले सकती

हे. पति का गेर ज़िम्मेदार होना, पत्नी का आर्थिक निबाह न करना, नपुंसक होना, जेल में होना,

क्रूर होना, मानसिक रूप से अस्थिर होना, मारपिट करना जैसे कई कारण से पत्नी को तलाक का

क़ानूनी हक दिया गया हे.

 

असल में तो शादी दो व्यक्ति के बिच और दो परिवार के बिच एक आत्मीय और गंभीर रिश्ते

का दूसरा नाम हे. लेकिन सामाजिक दबाव और कुरीतियों के चलते हमारे देश में इसका कुछ

और ही स्वरूप बन गया हे जो की काफी डरावना हो सकता हे. सोचने की बात हे की मजहब का

नाम लेकर कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती हे और पूरी जिंदगी ये उम्मीद की जाती

हे की शादी को निभाना ही एक मात्र रास्ता हे जब की मजहब कुछ और ही कहता हे!

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7 Comments Add yours

  1. reshma says:

    As salamualaiqum plz help me meri sadhi mere ghar wale ne mujhe majboor kar ke karwa di ab mai sadhi ke baad apne sasural nahi jana chahati Kyu ki jis insan se meri sadhi hui ha wo ak no ka jhutaa insan hai wo bolta mujhe khuda pe yakin nahi nah jahanm hai nah jannat hai sab aise hi ak kitab ki kahani hai nah mai manta hun nah tumko manne duga aur gali galaoch karta ha mujhe bolta tum meri khuda ho mai tumko pujuga maine usko samjhya but wo samjhne ko taiyar nahi ab toh mujhe ussey nafrat ho gyi is liye mai nahi jana chahati but mere ghar wale mera sath nahi de rahe wo mujhe jabarjasti bhejna chahate maine sab kuch btaya phir bhi mujhe kuch samjh nahi a raha mai kya karu mujhe khulaa chahiye mai kya karu kaise lun ussey talaq khula mera sath koi nahi de raha sab ko apni izzat ki padi hai aur meri zindagi naraq ho rahi kya mai curt se khula le sakti hun mere pas iske siwa koi rasta nahi ussey itni nafrat ha ki uska chera bhi dekhna gawara nahi ya phir mai apni jaan de du plz koi rasta bata dijiye mujhe

    Mera contec no plz help me

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  2. A far says:

    Assalam u alykum,
    Meri Sali ka 10 Sal se court me case Chaloo hain,
    US ka husband us ko le ker bhi nahi ja raha Hain aur Talak bhi nahi de raha hain, aur us ne doosri Saadi bhi ker like hain.
    Kya aurat Talak le Sakti hain, aur Talak ke bad us ka dahej & jewelry wapas milegi?
    Please help what we do for her,
    Allah hafiz

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  3. nikhat praween says:

    Ji mera nam nikhat hai plz khula se realated mujhe kuchh khas baten karni hai meri life bilkul tabahi me hai plz help me my contact no. Is 7857814200 plz.. contact me mai talak chahti hu but husband talak nahi de rahe khula lekar fir main kaise jiyun kaise apna hak paun kahan jaung agar khula se sare hak mere mar diye gaye to.. plz help me

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    1. Advocate Hashmi says:

      You can contact with me 7000234513

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  4. Arvind Lal says:

    आप तलाकशुदा महिलाओं को तलाक के बाद पति के जायदाद में से आधे हिस्से की भी माँग करें। बच्चे सिर्फ माँ की ही जिम्मेदारी नहीं होते पिता की भी जिम्मेदारी हैं। बच्चों की परवरिश का खर्च मासिक आधार पर मिलना चाहिए। आप ऐसे मर्दो को आर्थिक बन्धन में बाँधने की दिशा में भी कानूनी और सामाजिक तौर पर बाँधने का प्रयास करें। सारी झूठी मर्दानगी अपने आप काबू में चली आएगी। आपके संघर्ष को सलाम। ईश्वर एक है इसी धारणा को मानते हुए मैं ईश्वर से आपके आन्दोलन के सफल होने की दुआ करूँगा। आपकी जीत नारी शक्ति की जीत होगी।

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  5. Meri sali tayyaba k sat us k sasral wahle jolom karte hai is liye meri sali apnih maa k yaha aai hai
    App logo se binti hai aap log is ka insaf kareh koi k merah sasral garib hai khod ka gahar b nahi
    Mera naam Rizwan Ali sk

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  6. abdul samee says:

    assalamualikum
    agar koi girl sirf paise k liye shadi k liye ha karti hai aur jab shadi k bad pata chalta hai k wo garib hai is wajah se wo girl husband k karib nahi ati to aur agar husband talaq dena chaye to phansane ki bat karti hai jhoote case me … to aisi mahilao k liye ap kya kahenge madam
    mujhe apke jawab ka intezar rahega.. allah hafizz..

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